जनजातीय परंपरा ही भारत की आत्मा – केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू

रायपुर :जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्यमंत्री तोखन साहू रायपुर स्थित एकलव्य प्रयास आवासीय विद्यालय पहुँचे। कार्यक्रम की शुरुआत में उन्होंने छात्रों द्वारा जनजातीय नायकों और नायिकाओं पर तैयार की गई आकर्षक रंगोलियों का अवलोकन किया और उनकी सृजनात्मक प्रतिभा की सराहना की। इस अवसर पर राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) तथा संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) में चयनित जनजातीय विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया गया।
राज्यमंत्री साहू ने विद्यार्थियों के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जनजातीय गौरव दिवस पर दिया गया राष्ट्रीय संबोधन वर्चुअल माध्यम से सुना, जिसमें प्रधानमंत्री ने वीर नारायण सिंह के अप्रतिम शौर्य तथा जनजातीय संग्रहालयों की ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख किया।
अपने संबोधन में साहू ने कहा कि जनजातीय समाज का इतिहास, परंपरा, संस्कृति और ज्ञान भारतीय सभ्यता की जड़ों में बसे हुए हैं। उन्होंने कहा कि “प्रकृति के साथ सामंजस्य, श्रम को पूजा मानना, तथा धरती को माता रूप में पूजना — ये मूल्य हमें जनजातीय समाज से प्राप्त हुए हैं। यह समाज केवल परंपरा नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है।”
साहू ने विभिन्न जनजातीय नायकों के योगदान को नमन करते हुए कहा कि अंग्रेजी सत्ता के विरुद्ध सबसे प्रखर आवाजें वनों और पहाड़ों से उठीं। उन्होंने धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा और उनके ‘उलगुलान’ आंदोलन, शहीद वीर नारायण सिंह (1857 का विद्रोह), वीर गुंडाधुर (1910 का भूतान आंदोलन), तिलका मांझी, सिदो–कान्हू, कोया–कोल आंदोलन, मानगढ़ के बलिदान तथा रानी गाइदिन्ल्यू जैसे जनजातीय महानायक–महानायिकाओं को स्मरण किया।
उन्होंने कहा कि “जनजातीय नायकों का त्याग और संघर्ष भारत की स्वतंत्रता की प्रकाश-रेखा है। उनका योगदान हमारी राष्ट्रीय चेतना का आधार है।”
राज्यमंत्री ने भगवान बिरसा मुंडा के जीवन और संघर्ष को विस्तार से याद करते हुए कहा कि ब्रिटिश शासन और मिशनरी दमन के विरुद्ध वर्ष 1899 में बिरसा मुंडा द्वारा दिया गया ‘उलगुलान’ आत्मसम्मान और स्वतंत्रता का उद्घोष था। “अबुआ दिशोम, अबुआ राज” का उनका संदेश आज भी जनजातीय गर्व और स्वाभिमान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मात्र 25 वर्ष की अल्पायु में भी बिरसा मुंडा ने औपनिवेशिक शासन की नींव हिलाकर रख दी।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस घोषित कर इतिहास को उसका योग्य स्थान दिलाया है।
साहू ने कहा कि जनजातीय समाज के विकास की संस्थागत नींव पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने तब रखी जब उन्होंने स्वतंत्र जनजातीय कार्य मंत्रालय की स्थापना की। प्रधानमंत्री मोदी ने इस यात्रा को नई ऊँचाई प्रदान की है। राष्ट्रीय जनजाति आयोग (एनसीएसटी) को अधिक शक्तियां प्रदान की गईं, देश में पहली बार जनजातीय महिला के रूप में द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपतित्व का गौरव प्राप्त हुआ, “आदि महोत्सव” ने जनजातीय कला को वैश्विक पहचान दी, ट्राइब्स इंडिया (ट्राइफेड) और वन धन केंद्रों ने वनोपज और जनजातीय हस्तशिल्प को उचित मूल्य दिलाया तथा एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों का देशभर में विस्तार हुआ है।
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन अग्रवाल, नगर निगम रायपुर के आयुक्त विश्वदीप, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा अनेक जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।



