होमस्टेज़ ऑफ इंडिया की पहल से जशपुर में सामुदायिक पर्यटन को नई पहचान
तमिलनाडु से आए पहले अतिथि ने सामुदायिक होमस्टे में लिया ग्रामीण जीवन का सुकून भरा अनुभव

रायपुर : होमस्टेज़ ऑफ इंडिया द्वारा छत्तीसगढ़ में सामुदायिक पर्यटन को सशक्त करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के तहत जशपुर जिले में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। तमिलनाडु से आए पहले अतिथि का जशपुर के सामुदायिक होमस्टे में स्वागत किया गया। यह पहल जशपुर को राज्य के एक मॉडल कम्युनिटी टूरिज़्म गंतव्य के रूप में विकसित करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
तमिलनाडु निवासी महेश, जो सड़क मार्ग से भारत भ्रमण पर निकले हैं, अपनी यात्रा के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में होमस्टे में ही ठहर रहे हैं। उन्होंने बताया कि घर जैसा सादा एवं पौष्टिक भोजन तथा स्थानीय संस्कृति और जीवनशैली को नज़दीक से समझने की इच्छा ने उन्हें होमस्टे को प्राथमिक विकल्प चुनने के लिए प्रेरित किया।
जशपुर प्रवास के दौरान महेश ने विपिन एवं उनके परिवार द्वारा संचालित होमस्टे में निवास किया। यह होमस्टे उस गांव का हिस्सा है, जिसे होमस्टेज़ ऑफ इंडिया ने जिला प्रशासन के सहयोग से सामुदायिक पर्यटन के मॉडल के रूप में विकसित किया है। अतिथि ने परिवार की आत्मीय मेहमाननवाज़ी, पारंपरिक तरीके से तैयार किए गए पौष्टिक भोजन तथा गांव और आसपास के शांत एवं प्राकृतिक वातावरण की विशेष सराहना की।
महेश ने कहा कि इंटरनेट और मोबाइल फोन से दूर गांव की शांति में बिताया गया समय उनके लिए मानसिक सुकून और आत्मिक ताज़गी का अनुभव लेकर आया।
इस प्रवास से होस्ट परिवार को अतिरिक्त आय प्राप्त हुई, जिससे उनकी आजीविका को मजबूती मिली। साथ ही, देश के दूसरे राज्य से आए अतिथि की मेज़बानी से परिवार को सांस्कृतिक आदान-प्रदान, नए अनुभव और पर्यटन से जुड़े व्यावहारिक ज्ञान का अवसर भी मिला। इससे परिवार के आतिथ्य कौशल, आत्मविश्वास और उद्यमशील क्षमता में वृद्धि हुई है।
होमस्टेज़ ऑफ इंडिया इस पहल के अंतर्गत होमस्टे विकास के साथ-साथ स्थानीय परिवारों के क्षमता निर्माण, आतिथ्य मानकों के सुदृढ़ीकरण, अतिथि अनुभव को बेहतर बनाने और जिम्मेदार पर्यटन प्रथाओं को अपनाने पर निरंतर सहयोग कर रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पर्यटन का प्रत्यक्ष लाभ स्थानीय समुदायों तक पहुंचे और साथ ही स्थानीय संस्कृति, परंपराओं एवं प्राकृतिक विरासत का संरक्षण भी बना रहे।
यह अनुभव दर्शाता है कि आज के जागरूक पर्यटक स्लो ट्रैवल, स्थानीय भोजन, मानवीय जुड़ाव और प्रकृति के समीप रहने को प्राथमिकता दे रहे हैं। जशपुर जैसे क्षेत्र ऐसे यात्रियों के लिए राज्य के उभरते हुए ईको-टूरिज़्म और कम्युनिटी टूरिज़्म गंतव्य के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं। यह पहल न केवल छत्तीसगढ़ के ग्रामीण पर्यटन को नई दिशा दे रही है, बल्कि ग्रामीण परिवारों के लिए स्थायी आजीविका, सम्मानजनक आय और व्यापक पहचान का मार्ग भी प्रशस्त कर रही है।



