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 सामुदायिक डबरी निर्माण से जल संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को मिलेगा नया आधार

लेख -शशिरत्न पाराशर, उप संचालक
धमतरी : जिले में जल संरक्षण, भूजल संवर्धन और ग्रामीण आजीविका के साधनों को मजबूत बनाने की दिशा में सामुदायिक डबरी निर्माण कार्यों को महत्वपूर्ण पहल के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। जिले में जल संरक्षण, भूजल संवर्धन और ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाने की दिशा में 34 सामुदायिक डबरी निर्माण जिनकी स्वीकृत राशि – 172.13 लाख रुपए महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है। वीबी-जी रामजी योजनांतर्गत संचालित इन कार्यों से ग्रामीण क्षेत्रों में जल संचयन की क्षमता बढ़ाने के साथ ही कृषि एवं अन्य आजीविका गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य केवल जल संचयन तक सीमित नहीं है, बल्कि उपलब्ध जल संसाधनों का उपयोग ग्रामीण आवश्यकताओं और आजीविका संवर्धन से जोड़ना भी है।

वर्षा जल संचयन से जल उपलब्धता बढ़ाने की पहल

ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि और अन्य गतिविधियों के लिए पानी की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। विशेषकर वर्षा पर निर्भर खेती करने वाले किसानों के लिए जल संरक्षण की संरचनाएं उपयोगी साबित हो सकती हैं। सामुदायिक डबरी के माध्यम से वर्षा जल को एकत्रित कर स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उसका उपयोग किया जा सकता है। इससे जल संसाधनों के समुचित प्रबंधन को बढ़ावा मिलने के साथ ही पानी की उपलब्धता के वैकल्पिक साधन विकसित करने में सहायता मिलेगी।

सामुदायिक डबरी का महत्व इस बात में भी है कि एक ही जल संरचना का लाभ नियमानुसार अनेक ग्रामीण परिवारों तक पहुंचाया जा सकता है। सामूहिक उपयोग की व्यवस्था से जल संसाधनों के प्रति साझा जिम्मेदारी विकसित होती है और ग्रामीण समुदाय प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभा सकता है।

कृषि एवं आजीविका के विविध अवसरों को मिलेगा प्रोत्साहन

सामुदायिक डबरी में संचित जल का उपयोग स्थानीय परिस्थितियों, जल उपलब्धता और तकनीकी उपयुक्तता के आधार पर कृषि एवं अन्य अनुमेय गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। इससे किसानों को खेती की बेहतर योजना बनाने, उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने और कृषि आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहित करने में सहयोग मिल सकता है।

जहां पर्याप्त जल उपलब्धता, उपयुक्त परिस्थितियां और आवश्यक तकनीकी सुविधाएं हों, वहां नियमानुसार मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों की संभावनाओं का भी आकलन किया जा सकता है। इस प्रकार जल संरचनाओं को आजीविका के अवसरों से जोड़कर ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने की दिशा में प्रयास किए जा सकते हैं। हालांकि, इन संभावनाओं का वास्तविक लाभ जल उपलब्धता, संरचना की उपयोगिता और संबंधित विभागीय प्रावधानों पर निर्भर करेगा।

टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण पर विशेष ध्यान

सामुदायिक डबरी की दीर्घकालीन उपयोगिता सुनिश्चित करने के लिए निर्माण कार्यों में निर्धारित तकनीकी मानकों, गुणवत्ता और विभागीय दिशा-निर्देशों का पालन आवश्यक है। इसके साथ ही कार्यों की नियमित निगरानी, समयबद्ध पूर्णता तथा निर्माण के बाद उचित रखरखाव पर भी ध्यान दिया जा रहा है। जल संरचनाओं का प्रभावी उपयोग तभी संभव है, जब उनके संरक्षण और संचालन में स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित हो।

ग्रामीणों को जल संचयन, जल के विवेकपूर्ण उपयोग और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूक करना भी इस पहल का महत्वपूर्ण पक्ष है। सामुदायिक सहभागिता से जल संरचनाओं के संरक्षण की जिम्मेदारी मजबूत होगी और निर्मित परिसंपत्तियों का लाभ लंबे समय तक प्राप्त किया जा सकेगा।

ग्रामीण विकास को मिलेगी स्थायी मजबूती

वीबी-जी रामजी योजनांतर्गत सामुदायिक डबरी निर्माण ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत संसाधनों के विकास और प्राकृतिक संपदा के बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इन संरचनाओं से जल संरक्षण को बढ़ावा देने के साथ ही कृषि आधारित आजीविका को सहयोग देने की संभावनाएं विकसित होंगी। स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप परिसंपत्तियों का निर्माण, उनका उचित रखरखाव और सामूहिक उपयोग ग्रामीण विकास को अधिक टिकाऊ बनाने में सहायक हो सकते हैं।

गुणवत्ता और समयबद्ध पूर्णता पर जोर

इस संबंध में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री जयंत नाहटा ने बताया कि सामुदायिक डबरी निर्माण जल संरक्षण और ग्रामीण आजीविका संवर्धन की दृष्टि से महत्वपूर्ण कार्य है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षा जल का संचयन बढ़ाने तथा स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप जल संसाधनों की उपयोगिता विकसित करना है। ऐसी संरचनाएं वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ भविष्य के लिए भी प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में योगदान दे सकती हैं।

उन्होंने बताया कि सामुदायिक डबरी निर्माण कार्यों में निर्धारित तकनीकी मानकों, गुणवत्ता और विभागीय दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। जनपद पंचायतों एवं मैदानी अमले को कार्यों की नियमित निगरानी करने तथा निर्धारित समय-सीमा में निर्माण पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही निर्मित परिसंपत्तियों के उचित रखरखाव और प्रभावी उपयोग पर भी ध्यान दिया जाएगा, ताकि ग्रामीणों को इनका दीर्घकालीन लाभ मिल सके।

सामुदायिक डबरी निर्माण की यह पहल जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन और ग्रामीण आजीविका को परस्पर जोड़ने का अवसर प्रदान करती है। गुणवत्तापूर्ण निर्माण, जनभागीदारी और सुनियोजित उपयोग के माध्यम से ये संरचनाएं गांवों को जल संरक्षण के प्रति अधिक सक्षम बनाने तथा ग्रामीण परिवारों को आजीविका के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने में सहायक हो सकती हैं।